डायरेक्ट रिक्रूट, compassionate और special appointees में सीनियरिटी किसकी ऊपर?

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जो लोग प्रतियोगी परीक्षा से सीधे भर्ती हुए (direct recruits) वे बाद में नियम 10(a)(i) के तहत अस्थायी रूप से लिए गए और बाद में नियमित किए गए special appointees से ऊपर होंगे। compassionate appointees (समवेदना द्वारा नियुक्त) अपने पुराने अस्थायी जुड़ने की तारीख की वजह से सीधे भर्ती वालों से अपने आप सीनियर नहीं मान सकते। compassionate और special appointees में कौन ऊपर होगा, यह नियमितकरण (regularisation) की तारीख से तय होगा।

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Legum Pacific ·

मान लीजिए आप तब जूनियर असिस्टेंट के रूप में अस्थायी तौर पर जुड़ गए थे जब पोस्ट फ्रीज़ थीं। बाद में कुछ लोगों को सार्वजनिक परीक्षा के बाद सीधे भर्ती किया गया। कुछ को compassionate grounds पर लिया गया (सरकारी कर्मचारी की मौत पर उसके आश्रित को नियुक्त करना)। सर्विस रिकॉर्ड के लिहाज से सीनियरिटी किसे मिलेगी?

क्या कहता है कानून?

तमिलनाडु सेवा नियम (Tamil Nadu Service Rules) में अस्थायी नियुक्तियों और सीनियरिटी तय करने के तरीके के नियम हैं। नियम 10(a)(i) उस स्थिति के लिए अस्थायी या एडहॉक नियुक्ति की इजाज़त देता है जहाँ तुरंत जरूरत हो। नियम 48 compassionate नियुक्तियों की अनुमति देता है। नियम 2(1) बताता है कि किस तारीख से किसी को सेवा में नियुक्त माना जाएगा (जैसे पहली बार ड्यूटी करने या प्रॉबेशन/ट्रेनिंग शुरू करने की तारीख)। नियम 35(a) कहता है कि सामान्य तौर पर सीनियरिटी अप्रूव्ड लिस्ट में रैंक या जहाँ एक से ज्यादा भर्ती तरीके हैं वहाँ नियुक्ति की तारीख से तय होती है।

राज्य सरकार ने कुछ गवर्नमेंट ऑर्डर भी निकाले। 14 सितंबर 1984 के एक G.O. में कहा गया था कि compassionate appointees की सीनियरिटी नियुक्ति की तारीख के आधार पर डायरेक्ट रिक्रूट्स के बीच रखी जा सकती है। बाद में राज्य ने अस्थायी नियुक्तियों को 26 जून 1984 से नियमित किया और विशेष अवशोषण नियम (1987) (Special Absorption Rules, 1987) बनाए। इन Special Absorption Rules की क्लॉज़ 10 (Clause 10) special appointees की सीनियरिटी से जुड़ी है और उसने 1983 की प्रतियोगी परीक्षा से चुने गए direct recruits को special appointees के ऊपर रखा।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या फैसला दिया?

दो जजों की बेंच (श्री चंद्रशेखर और एस.वी.एन. भट्टी, जज) ने 9 अक्टूबर 2026 को फैसला दिया। कोर्ट ने मुख्य रूप से ये बातें बताईं:

  • 1983 की प्रतियोगी परीक्षा से चुने गए direct recruits उन special appointees के ऊपर होंगे जो अस्थायी रूप से लिए गए थे और बाद में नियम 10(a)(i) के तहत नियमित किए गए। कोर्ट ने Special Absorption Rules की क्लॉज़ 10 को वैध माना जो direct recruits को special appointees से ऊपर रखती है।

  • compassionate appointees (जो शुरुआत में compassionate grounds पर लिए गए और बाद में नियमित किए गए) केवल अपनी पुरानी अस्थायी नियुक्ति तारीख की वजह से direct recruits से सीनियर होने का दावा नहीं कर सकते। कोर्ट ने कहा कि compassionate appointees अपनी उस वजह से direct recruits के बराबर नहीं खड़े होते।

  • compassionate appointees और special appointees के बीच की इंटर-से सीनियरिटी (inter se seniority) नियमितकरण (regularisation) की तारीख के आधार पर तय की जानी चाहिए। कोर्ट ने कहा कि वर्तमान हालात में नियमितकरण की तारीख उचित मानदंड है।

कोर्ट ने यह समझाया कि जो व्यक्ति पूरी नियमबद्ध चयन प्रक्रिया के बाद नियुक्त होता है, वह सामान्यतः उस व्यक्ति से ऊपर माना जाएगा जिसके पास केवल अस्थायी या एडहॉक दर्जा था और बाद में नियमित किया गया। नियोक्ता के पास अलग-अलग क्लासों की इंटर-से सीनियरिटी तय करने के लिए नियम बनाने का अधिकार होता है। ऐसे नियम केवल इसलिए रद्द नहीं किए जा सकते कि उससे किसी वर्ग को कठिनाई हो।

साधारण लोगों और विभागीय HR के लिए क्या मायने है?

  • अगर आप वह डायरेक्ट रिक्रूट हैं जिसने सार्वजनिक परीक्षा पास की है लेकिन पोस्ट पहले अस्थायी स्टाफ के कारण खाली नहीं मिली, तो कोर्ट के निर्णय के मुताबिक आप उन लोगों से ऊपर आएँगे जो अस्थायी थे और बाद में नियमित किए गए।
  • अगर आप compassionate appointee हैं, तो सिर्फ पहले अस्थायी जुड़ने की तारीख होने से आप अपने आप डायरेक्ट रिक्रूट्स से ऊपर नहीं मान लिए जाएंगे।
  • compassionate और special appointees के बीच में कौन ऊपर होगा, यह आम तौर पर आपकी नियमितकरण (regularisation) की तारीख से तय होगा।

कोर्ट ने यह भी कहा कि पुराने फैसलों में जहाँ नियम अनुमति देते हैं, अस्थायी या एडहॉक सेवा को पेंशन के लिए गिना गया है। यह बात पेंशन के गणना से जुड़ी है और सीनियरिटी के सवाल से अलग है।

नियोक्ता द्वारा बनाए गए नियमों का क्या मतलब?

कोर्ट ने माना कि नियोक्ता अलग-अलग कर्मचारियों की इंटर-से सीनियरिटी तय करने के लिए उचित नियम बना सकता है। Special Absorption Rules की क्लॉज़ 10 को राज्य द्वारा अपनाया गया वैध तरीका माना गया, जिससे direct recruits को special appointees से ऊपर रखा गया। कोर्ट ने इस तरीके की वैधता को बरकरार रखा।

मुख्य बातें

  • प्रतियोगी प्रक्रिया से आए direct recruits उन special appointees से ऊपर होंगे जो अस्थायी थे और बाद में नियमित हुए।
  • compassionate appointees अपने पुराने अस्थायी जुड़ने की तारीख की वजह से सीधे भर्ती वालों से अपने आप सीनियर नहीं होते।
  • compassionate और special appointees की तुलना में नियमितकरण की तारीख सबसे उचित मानदंड मानी जाएगी।
  • नियोक्ता को इंटर-से सीनियरिटी के नियम बनाने का अधिकार है; ऐसे नियम सिर्फ इसलिए अवैध नहीं होंगे कि उनसे किसी वर्ग को कठिनाई हो।
  • कोर्ट ने नोट किया कि जहाँ नियम अनुमति देते हैं, कुछ मामलों में अस्थायी या एडहॉक सेवा को पेंशन के लिए गिना गया है; पर यह पेंशन के सवाल है, सीनियरिटी का अलग मामला है।

स्रोत: Supreme Court of India (official judgment) (नए टैब में खुलता है) · M. Prema v. The State of Tamil Nadu Rep By Its Secretary To The Government & Ors., C.A. No. 8757 of 2013, 2026 INSC 1105

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