BNSS: FIR, Zero FIR और e‑FIR कैसे दर्ज हों — पुलिस FIR दर्ज करने से मना करे तो क्या करें

BNSS कहता है कि किसी भी संगीन (cognizable) अपराध की जानकारी मौखिक या इलेक्ट्रॉनिक रूप से दी जा सकती है। यह गाइड बताता है कि पुलिस को सूचना कैसे लिखनी चाहिए, दिल्ली में साइबर शिकायतों के लिए चल रहे e‑Zero FIR पायलट का क्या मतलब है, और अगर थानेदार FIR दर्ज करने से मना करे तो BNSS के तहत कानूनी रास्ता क्या है।

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Legum Pacific ·

मान l आप पहचानते हैं कि आप साइबर फाइनेंशियल फ्रॉड के शिकार हैं और पुलिस में शिकायत दर्ज कराना चाहते हैं। या आप चोरी की रिपोर्ट देने थाने जाते हैं और थाने वाला आपकी बात लिखने से इनकार कर दे। BNSS (नए दंड प्रक्रिया कानून) और हाल के सरकारी दस्तावेज़ बताते हैं कि सूचना कैसे दर्ज करनी है, e‑Zero FIR पायलट कैसे काम करता है, और इंकार होने पर statute क्या राहत देता है।

कानून क्या कहता है?

  • पहली बार में कानून का नाम: भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023) (BNSS)। यह कहती है कि किसी भी संगीन (cognizable) अपराध से जुड़ी जानकारी मौखिक रूप से या इलेक्ट्रॉनिक संचार के जरिए थाने के प्रभारी को दी जा सकती है।

  • अगर सूचना मौखिक दी जाती है, तो वह अधिकारी या उसकी हिदायत पर लिखित में उतारनी होगी और सूचना देने वाले को पढ़कर सुनानी होगी। हर ऐसी सूचना, चाहे पहले से लिखित हो या बाद में लिखी गई हो, उसे सूचना देने वाले द्वारा हस्ताक्षरित करना जरूरी है।

  • अगर सूचना इलेक्ट्रॉनिक संचार से दी जाती है, तो वह तब रिकॉर्ड की जाएगी जब सूचना देने वाले द्वारा तीन दिनों के भीतर उस पर हस्ताक्षर किया जाएगा।

  • सूचना का सार एक बुक में दर्ज किया जाना चाहिए जो अधिकारी द्वारा रखी जाती है और वह फॉर्म राज्य सरकार जो prescribe करती है वैसा होगा।

  • रिकॉर्ड की गई सूचना की एक कॉपी तुरंत और मुफ्त में सूचना देने वाले या पीड़ित को दी जानी चाहिए।

  • जिन अपराधों की सज़ा तीन साल या उससे अधिक परन्तु सात साल से कम है, उन मामलों में थानेदार, पूर्व अनुमति लेकर (Deputy Superintendent of Police या उससे ऊपर), या तो प्रारंभिक जांच कर सकता है कि क्या प्रामाणिक केस है (यह जांच चौदह दिनों के भीतर पूरी करनी होगी) या जहाँ प्रामाणिक केस है वहाँ सीधे जांच आगे बढ़ा सकता है।

(ये बातें BNSS की धारा 173 से ली गई हैं, जैसा कि आधिकारिक पाठ में दिया गया है।)

Zero FIR और e‑FIR क्या हैं?

  • सरकारी दस्तावेज़ बताते हैं कि Zero FIR वह FIR है जो किसी भी पुलिस स्टेशन में दर्ज की जा सकती है, भले ही उसकी टेरिटोरियल jurisdiction वहाँ न हो, BNSS की उन धाराओं के आधार पर जो इलेक्ट्रॉनिक जानकारी की अनुमति देती हैं।

  • एक सरकारी प्रेस रिलीज़ में दिल्ली में साइबर फाइनेंशियल क्राइम के लिए e‑Zero FIR पायलट का वर्णन है। इस पायलट के तहत, National Cybercrime Reporting Portal (NCRP) या हेल्पलाइन 1930 पर जो शिकायतें तय की गई मनी थ्रेशोल्ड से ऊपर होती हैं, वे अपने आप Delhi के e‑Crime Police Station में Zero FIR में बदल दी जाती हैं। उन इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड्स को टेरिटोरियल साइबरcrime पुलिस स्टेशनों को जांच के लिए भेजा जाता है।

  • प्रेस रिलीज़ में यह भी कहा गया है कि शिकायतकर्ता तीन दिनों के भीतर साइबरक्राइम पुलिस स्टेशन जा कर उस Zero FIR को टेरिटोरियल थाने में नियमित FIR में बदलवा सकते हैं।

(ये विवरण गृह मंत्रालय / प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो की आपूर्ति की गई सामग्री से लिए गए हैं।)

अगर पुलिस FIR दर्ज करने से इनकार करे तो कायदा क्या रास्ता देता है?

  • BNSS एक स्टैट्यूटरी (कानूनी) राहत देता है। अगर किसी पुलिस स्टेशन का प्रभारी धारा 173(1) के तहत दर्ज करने योग्य सूचना दर्ज करने से इनकार करता है, तो असंतुष्ट व्यक्ति उस सूचना का सार लिखकर और डाक द्वारा संबंधित Superintendent of Police (SP) को भेज सकता है।

  • अगर SP संतुष्ट हो जाता है कि जानकारी किसी संगीन अपराध को दर्शाती है, तो SP या तो खुद मामले की जांच करेगा या किसी अधीनस्थ पुलिस अधिकारी को जांच करने का निर्देश देगा। जिसे निर्देश दिया गया है, उसे उस अपराध के लिए स्टेशन के प्रभारी जितने अधिकार मिलते हैं, वे मिल जाते हैं।

  • अगर Superintendent of Police ऊपर वर्णित तरीके से कार्रवाई नहीं करता, तो क़ानून असंतुष्ट व्यक्ति को मजिस्ट्रेट के पास आवेदन करने की अनुमति देता है।

(ये कदम BNSS की धारा 173(4) में दिये गए हैं जैसा आधिकारिक पाठ में उद्धृत है।)

पुलिस और अधिकारियों के पास कितने दिन होते हैं?

  • इलेक्ट्रॉनिक जानकारी को तब रिकॉर्ड माना जाएगा जब उस पर सूचना देने वाले द्वारा तीन दिनों के भीतर हस्ताक्षर हो जाएं।

  • उन कुछ अपराधों के लिए जिनकी सज़ा तीन से सात साल के बीच है, BNSS अनुमति देता है कि पूर्व अनुमति लेकर प्रारंभिक जांच की जाए, और वह प्रारंभिक जांच चौदह दिनों के भीतर पूरी होनी चाहिए।

  • e‑Zero FIR पायलट की प्रेस रिलीज़ कहती है कि शिकायतकर्ता तीन दिनों के भीतर साइबरक्राइम पुलिस स्टेशन जाकर e‑Zero FIR को टेरिटोरियल स्टेशन में नियमित FIR में बदलवा सकता है।

  • BNSS यह भी कहता है कि रिकॉर्ड की गई सूचना की एक कॉपी तुरंत मुफ्त में सूचना देने वाले या पीड़ित को दी जाए।

(ये समय-सीमाएँ धारा 173 और सरकारी प्रेस रिलीज़ से ली गई हैं।)

आम लोगों के लिए इसका मतलब क्या है

  • BNSS साफ कहती है कि संगीन अपराध की जानकारी थाने पर मौखिक या इलेक्ट्रॉनिक दोनों तरह से दी जा सकती है। मौखिक सूचना लिख कर वापस पढ़ कर हस्ताक्षर करवानी होगी; इलेक्ट्रॉनिक सूचना पर तीन दिनों के भीतर हस्ताक्षर होने पर वह रिकॉर्ड हो जाएगी।

  • कानून चाहता है कि सूचना देने वाले या पीड़ित को रिकॉर्ड की हुई जानकारी की एक मुफ्त कॉपी तुरंत दे दी जाए।

  • अगर थाने का अधिकारी धारा 173(1) के तहत जानकारी दर्ज करने से इंकार कर दे, तो क़ानून Superintendent of Police के जरिए आगे का रास्ता देता है। अगर SP को जानकारी संगीन अपराध दिखती है तो वह जांच का आदेश देगा। अगर SP भी कार्रवाई नहीं करता तो मजिस्ट्रेट के पास आवेदन करना संभव है।

  • सरकार ने दिल्ली में कुछ साइबर फाइनेंशियल शिकायतों के लिए e‑Zero FIR पायलट की घोषणा की है, जो इलेक्ट्रॉनिक रिपोर्टिंग को उपयोग में लाती है और उन रिकॉर्ड्स को टेरिटोरियल साइबर स्टेशनों को भेजती है; प्रेस रिलीज़ के अनुसार शिकायतकर्ता तीन दिनों में उसे नियमित FIR में बदलवा सकते हैं।

मुख्य बिंदु

  • धारा 173 BNSS यह अनुमति देती है कि संगीन अपराध की जानकारी मौखिक या इलेक्ट्रॉनिक तरीके से दी जा सके और उसे सही तरह से दर्ज कर के हस्ताक्षर करवाना जरूरी है।
  • इलेक्ट्रॉनिक जानकारी पर तीन दिनों के भीतर हस्ताक्षर होने पर वह रिकॉर्ड मानी जाएगी; मौखिक बयान लिख कर सूचना देने वाले को पढ़कर सुनाया जाना चाहिए।
  • रिकॉर्ड की हुई जानकारी की एक मुफ्त कॉपी सूचना देने वाले/पीड़ित को तुरंत दी जानी चाहिए।
  • अगर स्टेशन के प्रभारी सूचना रिकॉर्ड करने से इंकार कर दें, तो BNSS कहता है कि सूचना का सार डाक से Superintendent of Police को भेजा जाए; अगर SP संतुष्ट हो तो जांच करानी होगी; SP न करने पर मजिस्ट्रेट के पास आवेदन की छूट है।
  • सरकारी मटेरियल दिल्ली में कुछ साइबर फाइनेंशियल शिकायतों के लिए e‑Zero FIR पायलट का जिक्र करता है जो कुछ NCRP/1930 शिकायतों को Zero FIR में बदल कर टेरिटोरियल साइबर स्टेशनों को भेजता है और तीन दिनों में नियमित FIR में बदलने का प्रावधान बताता है।

जिन कानूनों का हवाला दिया गया है

  • भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023) — धारा 173 (उप-धाराएँ 1 से 4) (आधिकारिक पाठ, Gazette of India Extraordinary)
  • Press Information Bureau, Ministry of Home Affairs — “e‑Zero FIR initiative” प्रेस रिलीज़ (19 May 2025) (सामग्री आपूर्ति की गई)
  • Press Information Bureau, Ministry of Home Affairs — “Main features of the new criminal laws” प्रेस रिलीज़ (20 Aug 2025) (सामग्री आपूर्ति की गई)

आधिकारिक स्रोत

यह गाइड क़ानून के आधिकारिक पाठ के आधार पर बताता है। अदालतों के फैसले इन धाराओं की व्याख्या बदल सकते हैं और किसी खास मामले में असर डाल सकते हैं। ऊपर दर्ज स्थिति 10 October 2026 तक उपलब्ध आधिकारिक दस्तावेज़ों पर आधारित है।

स्रोत: Official text (egazette.gov.in) (नए टैब में खुलता है)

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